भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट India Code पर जाकर "Bihar and Orissa Public Demand Recovery Act 1914" सर्च करें।
Serving a notice and a copy of the certificate to the "Certificate-debtor". देयता का खंडन
प्रमाण पत्र जारी होने के बाद, यह एक 'डिक्री' (Decree) के समान माना जाता है, जो सिविल न्यायालय द्वारा पारित हो। इसका अर्थ यह है कि इस बकाये को लेकर अब साधारण सिविल कोर्ट में अलग से मुकदमा दायर करने की आवश्यकता नहीं होती, और वसूली की कार्रवाई सीधे इस प्रमाण पत्र के आधार पर शुरू हो जाती है। धीरे-धीरे चुका देगा
यह अधिनियम 1914 में तत्कालीन बिहार और उड़ीसा प्रांत के लिए बनाया गया था, जब झारखंड भी बिहार का ही हिस्सा था।
Bihar and Orissa Public Demand Recovery Act 1914 PDF in Hindi कैसे डाउनलोड करें? धीरे-धीरे चुका देगा
यह अधिनियम मूल रूप से बिहार और उड़ीसा (अब ओडिशा) प्रांतों के लिए बनाया गया था। वर्तमान में, यह और झारखंड राज्यों में प्रभावी और व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
बिहार और उड़ीसा लोक माँग वसूली (झारखण्ड-संशोधन) विधेयक,2015 धीरे-धीरे चुका देगा
बिहार के एक छोटे से गाँव, चैनपुर में रामू नाम का एक किसान रहता था। रामू ने कुछ साल पहले खेती के लिए सरकारी सहकारी समिति से बड़ा ऋण (Loan) लिया था। फसल खराब होने और घर की जिम्मेदारियों के कारण वह समय पर किश्तें नहीं भर पाया। उसे लगा कि सरकारी पैसा है, धीरे-धीरे चुका देगा, लेकिन कानून अपना काम कर रहा था।
रामू ने अपनी कुछ गैर-जरूरी संपत्ति बेचकर और रिश्तेदारों से मदद लेकर बकाया पैसा और वसूली का खर्च जमा कर दिया। जैसे ही पूरी राशि जमा हुई, प्रमाणपत्र अधिकारी ने प्रमाणपत्र को रद्द (Cancel) कर दिया और रामू की जमीन फिर से मुक्त हो गई।
सर्टिफिकेट को सही माना जाता है जब तक कि उसे चुनौती न दी जाए।